जाने क्या कहा जाते हुए तूफ़ाँ ने मौजो से,
की लहरे आज भी साहिल से अपना सर टकरा टकराती है!इन बंद कमरो मे मेरी साँसे घुटी जाती है,खिड़खिया खोलू तो जहैरलि हवा आती है!